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Sunday, September 28, 2008

साप्ताहिक दृष्टिकोण: २९सितम्बर से ०३अक्तूबर २००८

अमरीका द्वारा सात खरब डालर मार्किट में उतारने से लघु काल के लिए उत्साह बढेगा, यद्यपि विश्व बाज़ारों को तकनीकी रूप से विकट गतिरोध या रुकावटों का सामना है। इन रुकावटों से बाज़ार वापस मुड़ कर फिर से नीचे की ओर रुख कर सकते हैं यदि यह रुकावटें पार न कर सके। गिरावट अभी समाप्त नही हुई है क्योंकि यह सात खरब केवल बड़े भूंचाल को कुछ हद तक सहन कर सकता है परन्तु टाल नही सकता। इस फैले हुए बैलून रूपी वित्तीय विष से हवा निकलने में पाँच से दस वर्ष लग सकते हैं। अर्थात, विकास के लिए अब अधिक सुविधा से धन उपलब्ध करना कठिन हो सकता है, जिसके फलस्वरूप पिछले कई वर्षों से चल रही मौज मस्ती की पार्टी फीकी पड़ जायेंगी।

यह कोई दंत कथा नही है। परन्तु ऐसा भी नही है कि आसमान टूट पड़ेगा। यह तो एक आर्थिक घटनाक्रम है जो समय समय पर मानव जाति को उसके असयंम या लालच की याद दिलाता है। दुर्भाग्यवश, इसका प्रभाव अंततः आम आदमी पर ही पड़ता है क्योंकि ऋण उपलब्ध न होने पर आर्थिक गतिविधि धीमी पड़ जाती है जिससे रोज़गार में भी कमी हो सकती है। आशा है कि इस अमरीकी आर्थिक सहायता से शायद प्रगति पर अधिक बुरा असर न पड़े।

कुछ क्षेत्र, जैसे ऊर्जा, स्वास्थ्य संबन्धी एवं खदान इत्यादि इस दौर में अच्छा लाभ कमा सकते हैं, परन्तु अभी इन स्तरों पर लम्बी अवधि की खरीद की सलाह नही है। अभी कुछ अरसा मार्किट के हाव-भाव को परखना आवश्यक होगा।

(कृपया इस सप्ताह अंग्रेजी के दृष्टिकोण से ही काम चलायें)
धन्यवाद।

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I have been analyzing Global markets successfully since Jan 2006. The archives could be tracked and compared with the charts to evaluate the outlook of this blog so far!